सभी पावन व्रत एवं त्यौहारसाप्ताहिक वार व्रत
ॐ
Shanivar Vrat (Saturday Fast)
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साप्ताहिक वार व्रत

शनिवार व्रत (शनि देव)

न्याय के देवता कर्मफलदाता शनिदेव की आराधना

शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या व संकटों के निवारण हेतु कर्मफलदाता शनिदेव और हनुमान जी को समर्पित पावन उपवास व दीपदान।

डाउनलोड सामग्री लिस्ट📿108 मंत्र जप साधनाWhatsApp शेयर🔔शनि/बालाजी आरती
🪔 पूजन सामग्री →
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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

3 चरण
1

प्रातः स्नान व काले/नीले वस्त्र धारण

🪔 पूजन सामग्री:काले तिल, लोहे की कील, सरसों का तेल

शनिवार को स्नान कर काले या गहरे नीले वस्त्र पहनें। शनि मंदिर अथवा पीपल के वृक्ष के नीचे पूजन करें।

📿मंत्र जप

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। ॐ शं शनैश्चराय नमः।

2

पीपल वृक्ष पूजन व सरसों के तेल का दीपक

🪔 पूजन सामग्री:सरसों का तेल, मिट्टी का चौमुखा दीया, काले तिल, उड़द

पीपल के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध और काले तिल चढ़ाएं। सरसों के तेल में काले तिल डालकर दीपक जलाएं और 7 परिक्रमा करें।

📿मंत्र जप

नमस्ते कोणसंस्थाय पिंगलाय नमोऽस्तु ते। नमस्ते बभ्रुरूपाय कृष्णाय च नमोऽस्तु ते॥

3

शनिवार व्रत कथा श्रवण व दान

🪔 पूजन सामग्री:कथा पोथी, काली उड़द दाल

राजा विक्रमादित्य और शनि देव की पावन कथा सुनें। शाम को किसी निर्धन को काली उड़द, छाता या जूते दान करें।

📿मंत्र जप

नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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शनि महामंत्र (Shani Mahamantra)

॥ ॐ शं शनैश्चराय नमः ॥ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

Om Sham Shanaishcharaya Namah | Nilanjanasamabhasam Raviputram Yamagrajam | Chhayamartandasambhutam Tam Namami Shanaishcharam ||

अर्थ: नीले अंजन के समान कांति वाले, सूर्य के पुत्र, यमराज के बड़े भाई, माता छाया के सुपुत्र शनिदेव को मेरा सादर प्रणाम।
📿108 बार✨ साढ़ेसाती, ढैय्या व शनि की महादशा में शांति, न्याय व कर्म सुधार।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

शनिवार व्रत कथा: राजा विक्रमादित्य और शनिदेव का न्याय

अहंकार का विनाश और शनि देव की कृपा

1कथा प्रसंग: ग्रहों में श्रेष्ठता का विवाद

एक बार नवग्रहों में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। राजा विक्रमादित्य ने सभी ग्रहों के बैठने हेतु सिंहासन बनवाए, जिसमें शनि देव को सबसे अंत में लोहे का सिंहासन मिला। शनि देव ने कुपित होकर कहा कि मेरा फल सबसे भीषण होता है। विक्रमादित्य पर साढ़ेसाती आई और उन्हें अपना राज्य गंवाकर तेल के कोल्हू में बैल की तरह जुतना पड़ा। अंत में जब विक्रमादित्य ने हाथ जोड़कर शनि देव की स्तुति की, तब शनि देव प्रसन्न हुए और उनका खोया हुआ राज्य व वैभव वापस लौटा दिया।

कथा श्रवण फल:

शनि की पीड़ा से मुक्ति, कोर्ट-कचहरी में विजय और जीवन में स्थायित्व।

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कपूर आरती, पुष्पांजलि एवं क्षमा प्रार्थना स्तुति

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔कपूर गौरं स्तुति

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔आत्म समर्पण प्रार्थना

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

🔔महाआरती (ॐ जय जगदीश हरे)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।

सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥

🔔क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥

साक्षात दिव्य गर्भगृह प्रसारण

साक्षात शनि/बालाजी आरती व दिव्य गर्भगृह दर्शन में सम्मिलित हों

🔔शनि/बालाजी आरती लाइव दर्शन देखें
🪔पूजन सामग्री की संपूर्ण वैदिक सूची

शनिवार व्रत (शनि देव) — पूजन सामग्री

शास्त्रोक्त सामग्री, फल, पुष्प, नवग्रह समिधा व आवश्यक पूजन विधान सूची देखें।

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