रविवार व्रत कथा: वृद्धा ब्राह्मणी और कामधेनु गाय
सूर्य देव की असीम कृपा और दरिद्रता का नाश
1कथा प्रसंग: वृद्धा की निष्ठा और सूर्य कृपा
एक धर्मपरायण वृद्धा प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व उठकर अपने आंगन को गाय के गोबर से लीपती और रविवार का व्रत रखती थी। इससे उसका घर सदा धन-धान्य से भरा रहता था। पड़ोसन ने ईर्ष्यावश अपनी गाय को अंदर बांध दिया ताकि वृद्धा को गोबर न मिले। भगवान सूर्य ने वृद्धा के कष्ट को देखकर उसे एक दिव्य कामधेनु गाय प्रदान की जो सोने का गोबर देती थी। राजा को जब पता चला तो उसने गाय छीन ली, किंतु स्वप्न में सूर्य देव की चेतावनी से डरकर राजा ने गाय वापस की और पूरे राज्य में रविवार व्रत का आदेश दिया।
आरोग्य, यश, कीर्ति और उच्च पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति।
