सभी पावन व्रत एवं त्यौहारसाप्ताहिक वार व्रत
ॐ
Ravivar Vrat (Sunday Fast)
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साप्ताहिक वार व्रत

रविवार व्रत (सूर्य देव)

प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य नारायण की उपासना

तेज, यश, आरोग्य, नेत्र ज्योति व मान-सम्मान में वृद्धि हेतु प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य को समर्पित पावन साप्ताहिक व्रत।

डाउनलोड सामग्री लिस्ट📿108 मंत्र जप साधनाWhatsApp शेयर🔔सूर्य / गंगा आरती
🪔 पूजन सामग्री →
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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

3 चरण
1

प्रातः स्नान व तांबे के लोटे से सूर्य अर्घ्य

🪔 पूजन सामग्री:तांबे का लोटा, लाल पुष्प, रोली, अक्षत

रविवार को सूर्योदय पूर्व उठें। तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालकर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दें।

📿मंत्र जप

ॐ घृणिः सूर्याय नमः। ॐ सूर्याय नमः। ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

2

आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ

🪔 पूजन सामग्री:स्तोत्र पोथी, लाल आसन

भगवान सूर्य के सम्मुख खड़े होकर आदित्य हृदय स्तोत्र अथवा गायत्री मंत्र का जप करें।

📿मंत्र जप

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्। जयावहं जपेन्नित्यमक्षयं परमं शुभम्॥

3

रविवार व्रत कथा श्रवण व भोजन

🪔 पूजन सामग्री:कथा पोथी, गेहूं की रोटी, गुड़

वृद्धा ब्राह्मणी की पावन कथा सुनें। रविवार को नमक का पूर्ण त्याग करें। केवल गेहूं की रोटी, गुड़ या दलिया एक बार ग्रहण करें।

📿मंत्र जप

नमो धर्मनिधानाय नमः सुकृतसाक्षिणे। नमः प्रत्यक्षदेवाय भास्कराय नमो नमः॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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सूर्य बीज महामंत्र

॥ ॐ घृणिः सूर्याय नमः ॥ ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥

Om Ghrinih Suryaya Namah | Om Hram Hreem Hroum Sah Suryaya Namah ||

अर्थ: समस्त संसार को प्रकाश और जीवन देने वाले भगवान भुवन भास्कर को मेरा नमस्कार।
📿108 बार✨ आत्मविश्वास, नेत्र ज्योति, सरकारी नौकरी, मान-सम्मान व पितृ दोष शांति।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

रविवार व्रत कथा: वृद्धा ब्राह्मणी और कामधेनु गाय

सूर्य देव की असीम कृपा और दरिद्रता का नाश

1कथा प्रसंग: वृद्धा की निष्ठा और सूर्य कृपा

एक धर्मपरायण वृद्धा प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व उठकर अपने आंगन को गाय के गोबर से लीपती और रविवार का व्रत रखती थी। इससे उसका घर सदा धन-धान्य से भरा रहता था। पड़ोसन ने ईर्ष्यावश अपनी गाय को अंदर बांध दिया ताकि वृद्धा को गोबर न मिले। भगवान सूर्य ने वृद्धा के कष्ट को देखकर उसे एक दिव्य कामधेनु गाय प्रदान की जो सोने का गोबर देती थी। राजा को जब पता चला तो उसने गाय छीन ली, किंतु स्वप्न में सूर्य देव की चेतावनी से डरकर राजा ने गाय वापस की और पूरे राज्य में रविवार व्रत का आदेश दिया।

कथा श्रवण फल:

आरोग्य, यश, कीर्ति और उच्च पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति।

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कपूर आरती, पुष्पांजलि एवं क्षमा प्रार्थना स्तुति

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔कपूर गौरं स्तुति

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔आत्म समर्पण प्रार्थना

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

🔔महाआरती (ॐ जय जगदीश हरे)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।

सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥

🔔क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥

साक्षात दिव्य गर्भगृह प्रसारण

साक्षात सूर्य / गंगा आरती व दिव्य गर्भगृह दर्शन में सम्मिलित हों

🔔सूर्य / गंगा आरती लाइव दर्शन देखें
🪔पूजन सामग्री की संपूर्ण वैदिक सूची

रविवार व्रत (सूर्य देव) — पूजन सामग्री

शास्त्रोक्त सामग्री, फल, पुष्प, नवग्रह समिधा व आवश्यक पूजन विधान सूची देखें।

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