ॐ
Amavasya Vrat (New Moon Fast)
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मासिक पावन व्रत

अमावस्या व्रत (पितृ तर्पण)

पितृ तर्पण, श्राद्ध एवं आत्मिक शांति हेतु

पितरों के तर्पण, पितृ दोष शांति, दान-पुण्य एवं आध्यात्मिक शुद्धि हेतु प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि पर रखा जाने वाला व्रत।

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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

3 चरण
1

पवित्र नदी स्नान व पितृ तर्पण

🪔 पूजन सामग्री:कुशा, काले तिल, जौ, सफेद चंदन, तांबे का तर्पण पात्र

अमावस्या के दिन सूर्योदय पूर्व पवित्र नदी अथवा घर में गंगाजल डालकर स्नान करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख कर तांबे के पात्र में जल, काले तिल, जौ, सफेद पुष्प और कुशा लेकर पितरों को तर्पण दें।

📿मंत्र जप

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः। ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्त्वपः।

2

पीपल वृक्ष पूजन व पंचबलि कर्म

🪔 पूजन सामग्री:कच्चा दूध, गंगाजल, पंचबलि अन्न, सरसों तेल का दीपक

पीपल के वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध और जल अर्पित करें। गौ माता, श्वान (कुत्ता), कौआ, चींटी और देवादि के लिए पंचबलि भोजन निकालें।

📿मंत्र जप

ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः॥

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ब्राह्मण भोजन व दान

🪔 पूजन सामग्री:ब्राह्मण भोजन सामग्री, वस्त्र, दक्षिणा

पितरों के निमित्त सात्विक भोजन (खीर, पूड़ी, सब्जी) बनाकर योग्य ब्राह्मण को भोजन कराएं और वस्त्र व दक्षिणा दान करें।

📿मंत्र जप

सर्वपितृभ्यो नमः। तृप्यध्वं तृप्यध्वं तृप्यध्वं॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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सर्वपितृ शांति महामंत्र

॥ ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः॥

Om Devatabhyah Pitribhyashcha Mahayogibhya Eva Cha | Namah Svadhayai Svahayai Nityameva Namo Namah ||

अर्थ: समस्त देवताओं, पितरों और महायोगियों को मेरा नित्य प्रणाम है। स्वाहा और स्वधा स्वरूपिणी शक्तियों को बारंबार नमन।
📿21 बार✨ पितृ दोष शांति, वंश वृद्धि, कुल में शांति व सुख।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

सोमवती अमावस्या एवं पितृ तर्पण पावन कथा

सत्यवान-सावित्री और धोबिन सोना की कथा

1कथा प्रसंग: सावित्री द्वारा यमराज से पति रक्षा

सोमवती अमावस्या पर पतिव्रता सावित्री ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी दिन पितरों का स्मरण करने से तीन पीढ़ियों के पूर्वज तृप्त होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

कथा श्रवण फल:

पितरों की कृपा, अकाल बाधाओं से रक्षा और कुल में सुख-शांति।

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कपूर आरती, पुष्पांजलि एवं क्षमा प्रार्थना स्तुति

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔कपूर गौरं स्तुति

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔आत्म समर्पण प्रार्थना

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

🔔महाआरती (ॐ जय जगदीश हरे)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।

सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥

🔔क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥

साक्षात दिव्य गर्भगृह प्रसारण

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अमावस्या व्रत (पितृ तर्पण) — पूजन सामग्री

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