श्री सत्यनारायण भगवान की पावन व्रत कथा
स्कंद पुराण से शतानंद, लकड़हारा, साधु वैश्य व राजा तुंगध्वज की कथा
1प्रथम अध्याय: शतानंद ब्राह्मण की कथा
काशी के एक निर्धन ब्राह्मण शतानंद की गरीबी देखकर भगवान विष्णु वृद्ध ब्राह्मण के वेश में आए और सत्यनारायण व्रत का विधान बताया। ब्राह्मण ने व्रत किया और समस्त सुखों को प्राप्त किया।
2द्वितीय अध्याय: काष्ठ विक्रेता (लकड़हारा) प्रसंग
एक प्यासा लकड़हारा ब्राह्मण के घर पहुंचा और सत्यनारायण कथा सुनकर प्रभावित हुआ। उसने अपनी लकड़ी बेचकर जो धन मिला, उससे प्रभु का पूजन किया और धनवान बन गया।
3तृतीय अध्याय: साधु वैश्य और लीलावती की कथा
साधु नामक वैश्य ने संतान प्राप्ति हेतु व्रत का संकल्प लिया किंतु कन्या (कलावती) के जन्म के बाद भूल गया। परिणामस्वरूप उसका व्यापारिक जहाज समुद्र में डूबने लगा और वह कारागार में डाल दिया गया। पश्चाताप कर व्रत करने पर प्रभु ने उसे मुक्त किया।
समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, घर में सुख-समृद्धि और सत्य का वास होता है।
