ॐ
Sankashti Chaturthi
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मासिक पावन व्रत

संकष्टी चतुर्थी व्रत

विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी का संकट हरण व्रत

सभी प्रकार के कष्टों व संकटों से मुक्ति पाने हेतु भगवान गणेश जी को समर्पित पावन चतुर्थी व्रत, जिसमें चंद्र दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है।

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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

5 चरण
1

प्रातः स्नान व शिव संकल्प

🪔 पूजन सामग्री:सफेद वस्त्र, गंगाजल, तांबे का लोटा, घी का दीपक

सोमवार के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। सफेद वस्त्र धारण कर शिवलिंग के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर व्रत का संकल्प लें।

📿मंत्र जप

मम सकलमनोरथ सिद्धये सोमवारीय व्रतमहं करिष्ये।

2

शिवलिंग पर जल व पंचामृत अभिषेक

🪔 पूजन सामग्री:कच्चा दूध, गंगाजल, सफेद चंदन, अक्षत

तांबे के लोटे में गंगाजल, कच्चा गाय का दूध, अक्षत और सफेद चंदन मिलाकर शिवलिंग पर 'ॐ नमः शिवाय' जपते हुए धीरे-धीरे धार बनाकर अभिषेक करें।

📿मंत्र जप

ॐ नमः शिवाय। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्॥

3

बिल्वपत्र व श्वेत पुष्प अर्पण

🪔 पूजन सामग्री:बेलपत्र, धतूरा, सफेद आंकड़े के फूल, जनेऊ, भस्म

तीन पत्तियों वाला अखंडित बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद आंकड़े के फूल और सफेद जनेऊ भगवान शिव को अर्पित करें। माता पार्वती को सिंदूर लगाएं।

📿मंत्र जप

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥

4

सोमवार व्रत कथा श्रवण

🪔 पूजन सामग्री:कथा पोथी, अक्षत, सफेद पुष्प

हाथ में अक्षत व फूल लेकर साहूकार और उसके पुत्र की पावन सोमवार व्रत कथा का शांत मन से श्रवण करें।

📿मंत्र जप

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

5

शिव आरती व सात्विक फलाहार

🪔 पूजन सामग्री:कर्पूर, घंटी, खीर/फलाहार

कपूर से 'जय शिव ओंकारा' आरती करें। दिन में एक बार बिना नमक का सात्विक फलाहार अथवा खीर ग्रहण करें।

📿मंत्र जप

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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शिव पंचाक्षर मंत्र

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

Om Namah Shivaya

अर्थ: कल्याणकारी भगवान शिव को मेरा सादर नमन।
📿108 बार✨ मनोकामना पूर्ति, मानसिक शांति, चंद्र दोष निवारण।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

सोमवार व्रत की पावन कथा: साहूकार और शिव कृपा

शिव कृपा से अल्पायु पुत्र का जीवन दान

1प्रथम प्रसंग: निपुत्रिक साहूकार की अनन्य भक्ति

एक नगर में एक धनी साहूकार रहता था। उसके पास अपार धन-संपत्ति थी परंतु कोई संतान न होने के कारण वह दुखी रहता था। वह प्रतिदिन शिवालय जाकर निष्ठा से दीपक जलाता और भगवान शिव की आराधना करता। माता पार्वती के आग्रह पर शिव जी ने उसे पुत्र का वरदान दिया, किंतु यह भी कहा कि इस बालक की आयु मात्र 12 वर्ष होगी।

2द्वितीय प्रसंग: काशी यात्रा और राजकुमारी से विवाह

साहूकार का पुत्र जब 11 वर्ष का हुआ, तो उसे विद्याध्ययन हेतु मामा के साथ काशी भेजा गया। मार्ग में एक नगर में राजा की कन्या के विवाह के अवसर पर दूल्हा काना था, इसलिए छलपूर्वक साहूकार के सुंदर पुत्र से राजकुमारी का विवाह करा दिया गया। पुत्र ने राजकुमारी की चुनरी पर सत्य लिख दिया कि 'तुम्हारा विवाह मेरे साथ हुआ है, पर मैं काशी विद्याध्ययन जा रहा हूं।'

3तृतीय प्रसंग: शिव-पार्वती कृपा से पुनर्जीवन

काशी में 12 वर्ष पूर्ण होने पर बालक के प्राण पखेरू उड़ गए। मामा विलाप करने लगे। उसी समय शिव-पार्वती वहां से गुजरे। माता पार्वती के अनुरोध पर महादेव ने उस धर्मात्मा बालक को नया जीवन प्रदान कर दिया। वह अपनी वधु के साथ सकुशल घर लौटा।

कथा श्रवण फल:

सोमवार का व्रत करने और कथा सुनने से संतान सुख, दीर्घायु और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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कपूर आरती, पुष्पांजलि एवं क्षमा प्रार्थना स्तुति

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔कपूर गौरं स्तुति

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔आत्म समर्पण प्रार्थना

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

🔔महाआरती (ॐ जय जगदीश हरे)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।

सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥

🔔क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥

साक्षात दिव्य गर्भगृह प्रसारण

साक्षात आरती व दर्शन व दिव्य गर्भगृह दर्शन में सम्मिलित हों

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संकष्टी चतुर्थी व्रत — पूजन सामग्री

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