सभी पावन व्रत एवं त्यौहारप्रमुख पर्व एवं व्रत
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Navratri
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प्रमुख पर्व एवं व्रत

शारदीय / चैत्र नवरात्रि

माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की पावन आराधना

माँ भगवती दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की पूजा, घटस्थापना, अखंड ज्योति व जप-साधना का नौ दिवसीय पावन महापर्व।

डाउनलोड सामग्री लिस्ट📿108 मंत्र जप साधनाWhatsApp शेयर🔔माँ अंबे आरती
🪔 पूजन सामग्री →
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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

7 चरण
1

घटस्थापना एवं वेदी निर्माण

🪔 पूजन सामग्री:कलश, जौ, गंगाजल, आम के 5 पत्ते, नारियल, लाल चुन्नी, कलावा, अक्षत

शुभ मुहूर्त में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्वच्छ मिट्टी की वेदी बनाएं। उसमें सप्तधान्य अथवा जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश में पवित्र गंगाजल भरें, सुपारी, दूर्वा, सिक्का और आम्रपल्लव रखकर उस पर मौली बंधा नारियल स्थापित करें।

📿मंत्र जप

ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः। मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥

2

अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन एवं संकल्प

🪔 पूजन सामग्री:घी का दीपक, रुई की बत्ती, रोली, अक्षत, आचमनी

दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प व दक्षिणा लेकर नौ दिनों के उपवास और भगवती दुर्गा की प्रीति का संकल्प लें। शुद्ध गाय के घी अथवा तिल के तेल से मां के सम्मुख अखंड दीपक प्रज्ज्वलित करें।

📿मंत्र जप

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ ॐ विष्णवे नमः।

3

मां नवदुर्गा का ध्यान एवं आवाहन

🪔 पूजन सामग्री:लाल अड़हुल/गुड़हल पुष्प, अक्षत, धूप

हाथ में लाल पुष्प व अक्षत लेकर मां भगवती दुर्गा तथा उनके नौ पावन स्वरूपों (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री) का हृदय में ध्यान करें और चौकी पर उनका श्रद्धापूर्वक आवाहन करें।

📿मंत्र जप

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

4

षोडशोपचार पूजन एवं श्रृंगार

🪔 पूजन सामग्री:कुमकुम, सिंदूर, लाल चुनरी, चूड़ी, बिंदी, मेंहदी, इत्र, पुष्पमाला

मां को गंगाजल से स्नान कराएं, लाल चुनरी व वस्त्र अर्पित करें। चंदन, कुमकुम, सिंदूर, इत्र और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। ताजे पुष्पों की माला पहनाएं।

📿मंत्र जप

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ॐ दुर्गायै नमः सर्वोपचारार्थे गंधाक्षतपुष्पं समर्पयामि।

5

दुर्गा सप्तशती पाठ व नवार्ण जप

🪔 पूजन सामग्री:दुर्गा सप्तशती ग्रंथ, रुद्राक्ष/कमलगट्टा माला, आसन

श्री दुर्गा सप्तशती का श्रद्धापूर्वक पाठ करें अथवा दुर्गा चालीसा का वाचन करें। कमल गट्टे अथवा रुद्राक्ष की माला से नवार्ण मंत्र का 108 बार जप करें।

📿मंत्र जप

॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥

6

महाभोग एवं नैवेद्य समर्पण

🪔 पूजन सामग्री:हलवा, चना, पूरी, पंचामृत, फल, बताशा, लौंग, कपूर

मां को ऋतुफल, पंचामृत, हलवा, चना और पूरी का सात्विक भोग लगाएं। लौंग, इलायची और बताशे का पान बीड़ा अर्पित करें।

📿मंत्र जप

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा।

7

महाआरती, पुष्पांजलि व क्षमा प्रार्थना

🪔 पूजन सामग्री:कर्पूर, घंटी, शंख, आरती थाली

कपूर और पंचप्रदीप से मां अंबे की जयकारा लगाते हुए आरती करें। सभी को आरती दें और अंत में पूजन में किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

📿मंत्र जप

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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सिद्ध नवार्ण महामंत्र (Navarna Mantra)

॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥

Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Vichche

अर्थ: सरस्वती (ज्ञान), लक्ष्मी (वैभव) और काली (शक्ति) रूपी मां दुर्गा हमारे समस्त अज्ञान और कष्टों का नाश कर हमें परम तेज प्रदान करें।
📿108 बार (कम से कम 1 माला नित्य)✨ नवग्रह शांति, भय व शत्रु नाश, समस्त सिद्धियों की प्राप्ति।
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सर्वमंगल मांगल्ये श्लोक (Mangala Shloka)

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

Sarva Mangala Mangalye Shive Sarvartha Sadhike | Sharanye Tryambake Gauri Narayani Namostute ||

अर्थ: हे समस्त मंगलों को मंगल करने वाली, कल्याणकारी, सभी मनोरथों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्री गौरी नारायणी! आपको बारंबार नमस्कार है।
📿11 या 21 बार✨ पारिवारिक सौभाग्य, सुख-शांति व निर्विघ्न कार्य सिद्धि।
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देवी शक्ति स्तुति (Devi Stuti)

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

Ya Devi Sarva Bhuteshu Shakti Rupena Samsthita | Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah ||

अर्थ: जो देवी संपूर्ण प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं, उन्हें मेरा बारंबार नमस्कार, बारंबार प्रणाम है।
📿9 या 27 बार✨ आत्मविश्वास, ऊर्जा व मानसिक बल में वृद्धि।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

मां दुर्गा की पावन महिषासुर मर्दिनी कथा

देवी भागवत एवं मार्कंडेय पुराण से महिषासुर संहार व श्री राम विजय कथा

1प्रथम प्रसंग: महिषासुर का घमंड और देवताओं का संकट

प्राचीन काल में महिषासुर नामक पराक्रमी दैत्यराज ने घोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि किसी भी देवता, दानव अथवा पुरुष के हाथों उसकी मृत्यु न हो सके। वरदान के अहंकार में चूर होकर उसने स्वर्गलोक पर आक्रमण कर दिया और देवराज इंद्र सहित सभी देवताओं को सिंहासन से च्युत कर दिया। त्राहि-त्राहि करते हुए सभी देवता ब्रह्मा जी के नेतृत्व में भगवान विष्णु और महादेव शिव की शरण में पहुंचे।

2द्वितीय प्रसंग: देवताओं के तेज से आदिशक्ति मां दुर्गा का प्राकट्य

देवताओं का कष्ट सुनकर भगवान शिव और श्री हरि के मुख से एक परम तेज प्रकट हुआ। साथ ही समस्त देवगणों के शरीरों से निकले दिव्य तेजों का एकाकार होकर एक अत्यंत दिव्य स्त्री शक्ति का प्राकट्य हुआ, जिन्हें 'मां भगवती दुर्गा' कहा गया। महादेव ने उन्हें त्रिशूल, विष्णु जी ने चक्र, वरुण ने शंख, अग्नि ने शक्ति, वायु ने धनुष-बाण और इंद्र ने वज्र प्रदान किया। हिमवान ने मां को सवारी हेतु सिंह अर्पित किया।

3तृतीय प्रसंग: नौ दिवसीय भीषण संग्राम और महिषासुर मर्दन

मां दुर्गा की सिंह गर्जना से तीनों लोक कांप उठे। महिषासुर अपनी विशाल सेना लेकर युद्धभूमि में आया। मां भगवती ने नौ दिनों तक लगातार युद्ध करते हुए महिषासुर की समस्त सेना का संहार कर दिया। अंत में जब महिषासुर ने भैंसे का रूप धरकर आक्रमण किया, तब मां जगदंबा ने त्रिशूल से उसके वक्षस्थल पर प्रहार कर उसका वध कर दिया। देवताओं ने पुष्प वर्षा कर मां को 'महिषासुर मर्दिनी' नाम से वंदन किया। तभी से नौ दिनों तक नवरात्रि का पावन व्रत व पूजन किया जाता है।

4चतुर्थ प्रसंग: प्रभु श्री राम द्वारा शारदीय शक्ति उपासना

त्रेतायुग में लंकापति रावण पर विजय पाने हेतु महर्षि अगस्त्य के परामर्श पर भगवान श्री राम ने आश्विन मास में नौ दिनों तक मां दुर्गा का कठिन व्रत किया। प्रभु ने 108 नीले कमलों से मां की अर्चना की। परीक्षा लेने हेतु मां ने एक कमल छिपा दिया, तब श्री राम ने अपना 'राजीव नयन' (नेत्र) अर्पित करने हेतु तीर उठाया। मां दुर्गा तुरंत प्रकट हुईं और श्री राम को विजय का वरदान दिया। दसवें दिन दशहरा पर श्री राम ने रावण का संहार किया।

कथा श्रवण फल:

जो भी भक्त नवरात्रि में विधिपूर्वक व्रत रखकर इस पावन कथा का श्रवण व पठन करता है, मां भगवती उसके समस्त ज्ञात-अज्ञात संकट दूर कर घर में धन-धान्य, आयु और आरोग्य का वरदान देती हैं।

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माँ अम्बे गौरी जी की सम्पूर्ण आरती

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ जय अम्बे गौरी॥

🔔मुखड़ा

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

जय अम्बे गौरी॥

🔔प्रथम पद (दिव्य रूप)

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥

जय अम्बे गौरी॥

🔔द्वितीय पद (असुर संहार)

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥

जय अम्बे गौरी॥

🔔तृतीय पद (विजय एवं विजय रूप)

शुम्भ-निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र-विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

जय अम्बे गौरी॥

🔔चतुर्थ पद (मातृ शक्ति एवं योगिनी नृत्य)

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।

आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैंरू।

बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

जय अम्बे गौरी॥

🔔पंचम पद (जगन्माता एवं कृपा भाव)

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता।

भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पति कर्ता॥

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

जय अम्बे गौरी॥

🔔षष्ठ पद एवं पावन फल स्तुति

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥

श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावै।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पति पावै॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी॥

साक्षात दिव्य गर्भगृह प्रसारण

साक्षात माँ अंबे आरती व दिव्य गर्भगृह दर्शन में सम्मिलित हों

🔔माँ अंबे आरती लाइव दर्शन देखें
🪔पूजन सामग्री की संपूर्ण वैदिक सूची

शारदीय / चैत्र नवरात्रि — पूजन सामग्री

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