मां दुर्गा की पावन महिषासुर मर्दिनी कथा
देवी भागवत एवं मार्कंडेय पुराण से महिषासुर संहार व श्री राम विजय कथा
1प्रथम प्रसंग: महिषासुर का घमंड और देवताओं का संकट
प्राचीन काल में महिषासुर नामक पराक्रमी दैत्यराज ने घोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि किसी भी देवता, दानव अथवा पुरुष के हाथों उसकी मृत्यु न हो सके। वरदान के अहंकार में चूर होकर उसने स्वर्गलोक पर आक्रमण कर दिया और देवराज इंद्र सहित सभी देवताओं को सिंहासन से च्युत कर दिया। त्राहि-त्राहि करते हुए सभी देवता ब्रह्मा जी के नेतृत्व में भगवान विष्णु और महादेव शिव की शरण में पहुंचे।
2द्वितीय प्रसंग: देवताओं के तेज से आदिशक्ति मां दुर्गा का प्राकट्य
देवताओं का कष्ट सुनकर भगवान शिव और श्री हरि के मुख से एक परम तेज प्रकट हुआ। साथ ही समस्त देवगणों के शरीरों से निकले दिव्य तेजों का एकाकार होकर एक अत्यंत दिव्य स्त्री शक्ति का प्राकट्य हुआ, जिन्हें 'मां भगवती दुर्गा' कहा गया। महादेव ने उन्हें त्रिशूल, विष्णु जी ने चक्र, वरुण ने शंख, अग्नि ने शक्ति, वायु ने धनुष-बाण और इंद्र ने वज्र प्रदान किया। हिमवान ने मां को सवारी हेतु सिंह अर्पित किया।
3तृतीय प्रसंग: नौ दिवसीय भीषण संग्राम और महिषासुर मर्दन
मां दुर्गा की सिंह गर्जना से तीनों लोक कांप उठे। महिषासुर अपनी विशाल सेना लेकर युद्धभूमि में आया। मां भगवती ने नौ दिनों तक लगातार युद्ध करते हुए महिषासुर की समस्त सेना का संहार कर दिया। अंत में जब महिषासुर ने भैंसे का रूप धरकर आक्रमण किया, तब मां जगदंबा ने त्रिशूल से उसके वक्षस्थल पर प्रहार कर उसका वध कर दिया। देवताओं ने पुष्प वर्षा कर मां को 'महिषासुर मर्दिनी' नाम से वंदन किया। तभी से नौ दिनों तक नवरात्रि का पावन व्रत व पूजन किया जाता है।
4चतुर्थ प्रसंग: प्रभु श्री राम द्वारा शारदीय शक्ति उपासना
त्रेतायुग में लंकापति रावण पर विजय पाने हेतु महर्षि अगस्त्य के परामर्श पर भगवान श्री राम ने आश्विन मास में नौ दिनों तक मां दुर्गा का कठिन व्रत किया। प्रभु ने 108 नीले कमलों से मां की अर्चना की। परीक्षा लेने हेतु मां ने एक कमल छिपा दिया, तब श्री राम ने अपना 'राजीव नयन' (नेत्र) अर्पित करने हेतु तीर उठाया। मां दुर्गा तुरंत प्रकट हुईं और श्री राम को विजय का वरदान दिया। दसवें दिन दशहरा पर श्री राम ने रावण का संहार किया।
जो भी भक्त नवरात्रि में विधिपूर्वक व्रत रखकर इस पावन कथा का श्रवण व पठन करता है, मां भगवती उसके समस्त ज्ञात-अज्ञात संकट दूर कर घर में धन-धान्य, आयु और आरोग्य का वरदान देती हैं।
