सभी पावन व्रत एवं त्यौहारप्रमुख पर्व एवं व्रत
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Maha Shivaratri
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प्रमुख पर्व एवं व्रत

महाशिवरात्रि

देवाधिदेव महादेव व माता पार्वती का पावन मिलन

भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का महापर्व, जिसमें रात्रि जागरण, चार प्रहर रुद्राभिषेक व उपवास किया जाता है।

डाउनलोड सामग्री लिस्ट📿108 मंत्र जप साधनाWhatsApp शेयर🔔शिव महाआरती
🪔 पूजन सामग्री →
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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

6 चरण
1

प्रातः स्नान एवं संकल्प

🪔 पूजन सामग्री:गंगाजल, तिल, आचमनी, श्वेत वस्त्र

महाशिवरात्रि के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर जल में काले तिल व गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ श्वेत अथवा पीले वस्त्र धारण कर देवाधिदेव महादेव के सम्मुख व्रत का संकल्प लें।

📿मंत्र जप

शिवरात्रिव्रतं ह्येतत् करिष्येऽहं महाफलम्। निर्विघ्नमस्तु मे देव त्वत्प्रसादाज्जगत्पते॥

2

चार प्रहर रुद्राभिषेक विधान

🪔 पूजन सामग्री:गाय का कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद, गंगाजल, पंचामृत पात्र

शिवालय अथवा घर पर शिवलिंग पर प्रथम प्रहर में दूध, द्वितीय प्रहर में दही, तृतीय प्रहर में शुद्ध घी और चतुर्थ प्रहर में शहद व गंगाजल से रुद्राभिषेक करें।

📿मंत्र जप

ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च॥

3

बिल्वपत्र एवं भस्म समर्पण

🪔 पूजन सामग्री:108 बेलपत्र, चंदन, शमी पत्र, धतूरा, भांग, भस्म, सफेद मदार पुष्प

बिना कटे-फटे 108 या 21 बेलपत्रों पर चंदन से 'ॐ नमः शिवाय' लिखकर शिवलिंग पर चिकनी सतह की ओर से अर्पित करें। शमी पत्र, भस्म, धतूरा, भांग व मंदार पुष्प चढ़ाएं।

📿मंत्र जप

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥

4

महामृत्युंजय एवं पंचाक्षर जप

🪔 पूजन सामग्री:रुद्राक्ष माला, कुशासन

रुद्राक्ष की माला से भगवान आशुतोष के सिद्ध पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' अथवा महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।

📿मंत्र जप

॥ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्यgroupोर्मुक्षीय मामृतात् ॥

5

महाशिवरात्रि पावन व्रत कथा श्रवण

🪔 पूजन सामग्री:कथा पोथी, अक्षत, पुष्प

धूप-दीप प्रज्ज्वलित कर शिव-पार्वती विवाह एवं व्याध (शिकारी) गुरुद्रुह की मोक्षदायिनी कथा का श्रवण करें।

📿मंत्र जप

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

6

महाआरती एवं पारण

🪔 पूजन सामग्री:कर्पूर, घंटी, डमरू, आरती थाली

कर्पूर जलाकर 'कर्पूरगौरं करुणावतारं' से महादेव की आरती करें। अगली सुबह सूर्योदय के पश्चात स्नान व पूजन कर सात्विक प्रसाद से व्रत का पारण करें।

📿मंत्र जप

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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महामृत्युंजय संजीवनी महामंत्र

॥ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्यgroupोर्मुक्षीय मामृतात् ॥

Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam | Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Mamritat ||

अर्थ: हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते हैं जो सुगंधित हैं और समस्त जीवों का पोषण करते हैं। जिस प्रकार पका खरबूजा बेल के बंधन से मुक्त हो जाता है, उसी प्रकार हम मृत्यु के भय से मुक्त होकर अमरत्व को प्राप्त हों।
📿108 बार✨ अकाल मृत्यु से रक्षा, असाध्य रोगों का शमन, परम आत्मिक शांति।
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शिव पंचाक्षर महामंत्र

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

Om Namah Shivaya

अर्थ: सच्चिदानंद स्वरूप देवाधिदेव महादेव को मेरा सर्वस्व समर्पण व प्रणाम।
📿108 या 1008 बार✨ पंचतत्वों का संतुलन, भयमुक्ति, मोक्ष प्राप्ति।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

महाशिवरात्रि की पावन कथा: शिव-गौरी मिलन व शिकारी का उद्धार

शिव महापुराण से संकलित परम पावन आख्यान

1प्रथम प्रसंग: शिव एवं शक्ति का परम वैवाहिक मिलन

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की पावन रात्रि को देवाधिदेव महादेव और जगतजननी माता पार्वती का शुभ विवाह संपन्न हुआ था। इस दिन शिवजी वैरागी स्वरूप से गृहस्थ धर्म में प्रविष्ट हुए। इसलिए यह रात्रि शिव-शक्ति के परम मिलन का महापर्व मानी जाती है।

2द्वितीय प्रसंग: शिकारी गुरुद्रुह और बेलपत्र का अनजान समर्पण

शिवपुराण के अनुसार एक निर्दयी व्याध (शिकारी) वन में शिकार की खोज में भटक रहा था। सायंकाल तक कोई शिकार न मिलने पर वह भूख-प्यास से व्याकुल होकर एक जलाशय के किनारे बेल के पेड़ पर चढ़कर बैठ गया। पेड़ के नीचे एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित था, जिससे शिकारी अनभिज्ञ था। रातभर जागते हुए वह अनजाने में बेलपत्र तोड़कर नीचे गिराता रहा, जो सीधे शिवलिंग पर गिरते रहे। साथ ही उसकी आंखों से गिरे आंसू शिवलिंग पर गिरकर अभिषेक बन गए।

3तृतीय प्रसंग: मृग परिवार का सत्यनिष्ठ वचन और दया भाव

रात के चारों प्रहर में चार हिरण (मृग, मृगी व शावक) वहां आए। शिकारी ने जैसे ही बाण साधा, हिरणों ने अपने परिवार से मिलने के बाद स्वयं लौटने का वचन दिया। प्रातःकाल पूरा मृग परिवार अपने सत्य की रक्षा हेतु शिकारी के सामने आ खड़ा हुआ। उनके सत्य और त्याग को देखकर शिकारी का हृदय पिघल गया और उसने धनुष-बाण फेंक दिया।

4चतुर्थ प्रसंग: महादेव का प्राकट्य और मोक्ष वरदान

चारों प्रहर अनजाने में किए गए रुद्राभिषेक और हृदय की दया से प्रसन्न होकर भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। प्रभु ने शिकारी को सभी पापों से मुक्त कर 'गुह' नाम प्रदान किया और संपूर्ण मृग परिवार सहित उसे वैकुंठ/शिवलोक में स्थान दिया।

कथा श्रवण फल:

जो भी भक्त महाशिवरात्रि की पावन निशा में जागरण कर इस कथा का श्रवण करता है, उसके सात जन्मों के संचित पाप भस्म हो जाते हैं और वह अंत में शिवलोक को प्राप्त होता है।

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भगवान शिव जी की सम्पूर्ण आरती

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

🔔मुखड़ा

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

🔔प्रथम पद

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।

हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

🔔द्वितीय पद

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

🔔तृतीय पद

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

🔔चतुर्थ पद एवं समापन

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता।

जगकर्ता जगहर्ता जगपालनकर्ता॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।

प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

साक्षात दिव्य गर्भगृह प्रसारण

साक्षात शिव महाआरती व दिव्य गर्भगृह दर्शन में सम्मिलित हों

🔔शिव महाआरती लाइव दर्शन देखें
🪔पूजन सामग्री की संपूर्ण वैदिक सूची

महाशिवरात्रि — पूजन सामग्री

शास्त्रोक्त सामग्री, फल, पुष्प, नवग्रह समिधा व आवश्यक पूजन विधान सूची देखें।

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