ॐ
Ekadashi
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मासिक पावन व्रत

पावन एकादशी व्रत

भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित परम पावन तिथि

समस्त पापों के नाश व मोक्ष प्राप्ति हेतु प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की एकादशी को रखा जाने वाला अन्न-वर्जित पावन व्रत।

डाउनलोड सामग्री लिस्ट📿108 मंत्र जप साधनाWhatsApp शेयर🔔श्री जगदीश आरती
🪔 पूजन सामग्री →
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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

6 चरण
1

दशमी नियम एवं एकादशी संकल्प

🪔 पूजन सामग्री:गंगाजल, पीले वस्त्र, तांबे का लोटा, आचमनी

दशमी की शाम से ही सात्विक आहार लें और चावल का त्याग करें। एकादशी के दिन सूर्योदय पूर्व उठकर तीर्थजल अथवा गंगाजल युक्त जल से स्नान करें और पीत वस्त्र धारण कर भगवान नारायण का संकल्प लें।

📿मंत्र जप

एकादश्यां निराहारः स्थित्वाऽहमपरेऽहनि। भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत॥

2

श्री लक्ष्मीनारायण षोडशोपचार पूजन

🪔 पूजन सामग्री:पीत वस्त्र, गोपीचंदन, पीले पुष्प, तुलसी मंजरी, सफेद तिल, धूप, दीप

चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। पीले पुष्प, गोपीचंदन, अक्षत (सफेद तिल), और तुलसी मंजरी अर्पित करें। (एकादशी पर अक्षत के स्थान पर तिल का प्रयोग करें)।

📿मंत्र जप

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

3

तुलसी दल एवं पंचामृत भोग

🪔 पूजन सामग्री:पंचामृत, ताजे फल, मखाना खीर, तुलसी दल

भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं। ध्यान रहे एकादशी के दिन तुलसी दल न तोड़ें, एक दिन पूर्व तोड़ी गई तुलसी दल ही भोग में रखें। बिना तुलसी के श्रीहरि भोग स्वीकार नहीं करते।

📿मंत्र जप

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये।

4

विष्णु सहस्रनाम पाठ एवं द्वादशाक्षर जप

🪔 पूजन सामग्री:विष्णु सहस्रनाम पोथी, तुलसी माला

भगवान विष्णु के 'विष्णु सहस्रनाम' अथवा श्रीमद्भगवद्गीता के 11वें अध्याय का पाठ करें। तुलसी माला से 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जप करें।

📿मंत्र जप

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

5

माहात्म्य कथा श्रवण एवं रात्रि जागरण

🪔 पूजन सामग्री:कथा पुस्तक, घंटी, दीपक

एकादशी की पौराणिक कथा का भक्तिपूर्वक श्रवण करें। रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें।

📿मंत्र जप

कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात्। करोमि यद्यत्सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि॥

6

द्वादशी पारण मुहूर्त में पारण

🪔 पूजन सामग्री:ब्राह्मण भोजन सामग्री, दान दक्षिणा

द्वादशी तिथि के सूर्योदय पश्चात शुभ पारण मुहूर्त में ब्राह्मण को अन्न, वस्त्र व दक्षिणा दें। तत्पश्चात तुलसी दल व जल ग्रहण कर सात्विक भोजन से व्रत खोलें।

📿मंत्र जप

अज्ञानतिमिरान्धस्य व्रतेनानेन केशव। प्रसीद सुमुखो नाथ ज्ञानदृष्टिप्रदो भव॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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विष्णु द्वादशाक्षर महामंत्र

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

Om Namo Bhagavate Vasudevaya

अर्थ: समस्त सृष्टि के पालनहार, घट-घट वासी भगवान वासुदेव को मेरा सादर प्रणाम।
📿108 बार (तुलसी माला पर)✨ समस्त पापों का क्षय, मोक्ष, जीवन में सात्विक शांति।
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शांताकारं भुजगशयनं श्लोक

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

Shantakaram Bhujagashayanam Padmanabham Suresham | Vishvadharam Gaganasadrisham Meghavarnam Shubhangam ||

अर्थ: शांत स्वरूप, शेषनाग पर शयन करने वाले, कमलनाभि, देवताओं के ईश, विश्व के आधार, मेघ वर्ण वाले श्री हरि को नमन।
📿11 बार✨ मानसिक स्थिरता और लक्ष्मी-नारायण कृपा।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

एकादशी देवी के प्राकट्य की पावन कथा

पद्म पुराण से एकादशी उत्पत्ति व मुर दैत्य संहार

1प्रथम प्रसंग: मुर दैत्य का आतंक और देवताओं का पलायन

सतयुग में 'मुर' नाम का अत्यंत बलशाली दैत्य हुआ जिसने देवराज इंद्र को परास्त कर अमरावती पर अधिकार कर लिया। देवगण व्याकुल होकर क्षीरसागर में भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। श्रीहरि ने मुर की सेना से सैकड़ों वर्षों तक युद्ध किया।

2द्वितीय प्रसंग: हेमवती गुफा में श्रीहरि का शयन और कन्या का प्राकट्य

युद्ध करते हुए भगवान बदरिकाश्रम की 'हेमवती' नामक 12 योजन लंबी गुफा में विश्राम करने चले गए और योगनिद्रा में लीन हो गए। मुर दैत्य सोते हुए श्रीहरि पर प्रहार करने पहुंचा। उसी क्षण भगवान के शरीर के तेज से एक दिव्य अस्त्र-शस्त्र सुसज्जित देवी प्रकट हुईं।

3तृतीय प्रसंग: एकादशी देवी द्वारा मुर दैत्य का वध

उस तेजस्विनी कन्या ने हुंकार भरते हुए मुर दैत्य को युद्ध के लिए ललकारा और पलक झपकते ही उसके रथ को भस्म कर उसका वध कर दिया। योगनिद्रा से जागने पर भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर पूछा कि आप कौन हैं? देवी ने कहा—'प्रभु! मैं आपके ही अंश से उत्पन्न हुई हूं।'

4चतुर्थ प्रसंग: एकादशी नामकरण और परम वरदान

भगवान नारायण ने कहा—'चूंकि तुम्हारा प्राकट्य मार्गशीर्ष मास की एकादशी को हुआ है, अतः तुम्हारा नाम 'एकादशी' होगा। जो भी मनुष्य प्रत्येक माह की दोनों एकादशियों पर अन्न का त्याग कर व्रत रखेगा, उसे अश्वमेध यज्ञ से भी कोटि गुना अधिक फल प्राप्त होगा और वह वैकुंठ लोक का अधिकारी बनेगा।'

कथा श्रवण फल:

एकादशी व्रत की कथा का पाठ करने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है और जीवन के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

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कपूर आरती, पुष्पांजलि एवं क्षमा प्रार्थना स्तुति

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔कपूर गौरं स्तुति

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔आत्म समर्पण प्रार्थना

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

🔔महाआरती (ॐ जय जगदीश हरे)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।

सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥

🔔क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥

साक्षात दिव्य गर्भगृह प्रसारण

साक्षात श्री जगदीश आरती व दिव्य गर्भगृह दर्शन में सम्मिलित हों

🔔श्री जगदीश आरती लाइव दर्शन देखें
🪔पूजन सामग्री की संपूर्ण वैदिक सूची

पावन एकादशी व्रत — पूजन सामग्री

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