सभी पावन व्रत एवं त्यौहारप्रमुख पर्व एवं व्रत
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Karva Chauth
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प्रमुख पर्व एवं व्रत

करवा चौथ व्रत

अखंड सौभाग्य व पति की दीर्घायु हेतु व्रत

सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य एवं सुरक्षा के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाने वाला निर्जला व्रत।

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🪔 पूजन सामग्री →
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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

6 चरण
1

प्रातः सरगी ग्रहण विधान

🪔 पूजन सामग्री:सरगी थाली, फल, सूखे मेवे, फेनी, जल

सूर्योदय से पूर्व ब्राह्ममुहूर्त (सुबह 4:00 से 5:30) में उठकर स्नान करें। सास द्वारा दी गई सरगी की थाली (दूध, फेनी, मेवे, फल व मिष्ठान) का सेवन करें। इसके पश्चात दिनभर निर्जला उपवास रहता है।

📿मंत्र जप

ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः। अखंड सौभाग्यं देहि मे देवि नमस्तुभ्ये।

2

निर्जला व्रत संकल्प

🪔 पूजन सामग्री:तांबे का आचमनी पात्र, गंगाजल, अक्षत, पुष्प

हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य व अखंड सौभाग्य का दृढ़ संकल्प लें।

📿मंत्र जप

मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादिसुस्थिरश्री प्राप्तये करकचतुर्थीव्रतमहं करिष्ये।

3

सायंकालीन वेदी एवं करवा सजावट

🪔 पूजन सामग्री:मिट्टी के दो करवे, सींक, रोली, कलावा, अक्षत, खांड/बताशे, गेहूं के दाने

शाम को सोलह श्रृंगार कर लाल वस्त्र धारण करें। दीवार या पाटे पर करवा माता का चित्र लगाएं। मिट्टी के करवे में गेहूं, सिक्के और जल भरकर उस पर ढक्कन में खांड/बताशे रखें। शिव, पार्वती, कार्तिकेय व गणेश जी की स्थापना करें।

📿मंत्र जप

ॐ शिवायै नमः। ॐ उमायै नमः। ॐ गणपतये नमः।

4

करवा फेरने की परंपरा

🪔 पूजन सामग्री:करवा, श्रृंगार की थाली, 13 गेहूं के दाने

सुहागिन महिलाएं गोल घेरे में बैठकर करवा चौथ की लोक कथा गाती हैं और सात बार करवा फेरती हैं। 'ले सुहागन ले करवा, दे सुहागन दे करवा' बोलकर एक-दूसरे को करवा दिया जाता है।

📿मंत्र जप

नमः सौभाग्यदायिन्यै मम सौभाग्यं विवर्धय। दीर्घायुष्यं च मे भर्तुः कुरु कल्याणि सर्वदा॥

5

करवा चौथ व्रत कथा श्रवण

🪔 पूजन सामग्री:व्रत कथा पोथी, गेहूं के 13 दाने, दूर्वा

हाथ में गेहूं के 13 दाने और दूर्वा लेकर एकाग्रचित्त होकर वीरावती एवं करवा माता की अमर कथा का श्रवण करें। कथा पूर्ण होने पर दाने करवे पर अर्पित करें।

📿मंत्र जप

ॐ श्री करवा मात्रे नमः। सर्वकल्याणं कुरु कुरु स्वाहा।

6

चंद्रोदय दर्शन, अर्घ्य एवं पारण

🪔 पूजन सामग्री:छलनी, घी का दीपक, तांबे का लोटा (दूध-मिश्रित जल), मिष्ठान

चंद्रमा निकलने पर छलनी में जलता हुआ घी का दीपक रखें। छलनी की ओट से पहले चंद्रदेव के दर्शन करें, फिर उसी छलनी से पतिदेव का मुख देखें। तांबे के लोटे से चंद्रमा को अर्घ्य दें। पति के हाथों से जल पीकर और मिष्ठान ग्रहण कर व्रत खोलें।

📿मंत्र जप

गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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चंद्र अर्घ्य महामंत्र (Chandra Arghya Mantra)

गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥

Gaganarnavamanikya Chandra Dakshayanipate | Grihanarghyam Maya Dattam Ganeshapratirupaka ||

अर्थ: हे आकाश रूपी सागर के माणिक्य, दक्षपुत्री रोहिणी के प्रिय पति चंद्रदेव! गणेश स्वरूप आपको मेरा यह अर्घ्य सादर समर्पित है, इसे स्वीकार करें।
📿3 बार अर्घ्य देते समय✨ वैवाहिक जीवन में अमृत तुल्य मधुरता और पति की दीर्घायु।
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अखंड सौभाग्य प्रार्थना मंत्र

नमः सौभाग्यदायिन्यै मम सौभाग्यं विवर्धय। दीर्घायुष्यं च मे भर्तुः कुरु कल्याणि सर्वदा॥

Namah Saubhagyadayinyai Mama Saubhagyambhivardhaya | Dirghayushyam Cha Me Bhartuh Kuru Kalyani Sarvada ||

अर्थ: हे सौभाग्य प्रदान करने वाली करुणामयी माता पार्वती! मेरे सौभाग्य में निरंतर वृद्धि कीजिए और मेरे पति को दीर्घायु व निरोगी काया प्रदान कीजिए।
📿7 या 21 बार✨ पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम और परिवार की रक्षा।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

करवा चौथ की पावन वीरावती एवं करवा माता कथा

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी की अमर कथा

1प्रथम प्रसंग: राजकुमारी वीरावती का कठिन निर्जला व्रत

प्राचीन काल में एक धर्मात्मा ब्राह्मण के सात पुत्र और एक गुणवती पुत्री थी जिसका नाम वीरावती था। वीरावती का विवाह एक योग्य राजकुमार से हुआ। करवा चौथ पर वीरावती अपने मायके आई और भाभियों के साथ निर्जला उपवास रखा। भूख और प्यास के कारण संध्या समय तक वीरावती की दशा दुर्बल हो गई और वह मूर्छित होने लगी।

2द्वितीय प्रसंग: भाइयों का प्रेम और मायावी चंद्र दर्शन

अपनी लाडली बहन का कष्ट भाइयों से देखा न गया। उन्होंने नगर के बाहर एक ऊंचे वटवृक्ष पर जाकर अग्नि जलाई और छलनी के पीछे से प्रकाश दिखाकर वीरावती से कहा—'बहन! चंद्रोदय हो गया है, आकर अर्घ्य दे दो।' सरल हृदय वीरावती ने उसे ही सच्चा चंद्रमा मानकर अर्घ्य दिया और जैसे ही अन्न का पहला कौर मुंह में डाला, समाचार आया कि उसके पति राजा की अचानक मृत्यु हो गई है।

3तृतीय प्रसंग: माता इंद्राणी/पार्वती का आगमन और पति का पुनर्जीवन

वीरावती विलाप करने लगी। उसके सच्चे सतीत्व को देखकर देवराज इंद्र की पत्नी इंद्राणी (माता पार्वती) प्रकट हुईं। माता ने वीरावती को उसकी भूल बताई कि उसने अकाल चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ा है। वीरावती ने क्षमा याचना की और पूरे वर्ष प्रत्येक माह की चतुर्थी का निष्ठा से व्रत रखने का संकल्प लिया। अगली करवा चौथ पर वीरावती ने संपूर्ण विधि से निर्जला व्रत रखा। उसकी अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर यमराज ने उसके पति को पुनः नवजीवन प्रदान किया।

4चतुर्थ प्रसंग: पतिव्रता करवा की मगरमच्छ से रक्षा कथा

एक अन्य प्रसंग के अनुसार करवा नाम की पतिव्रता स्त्री जब नदी में स्नान कर रही थी, तब एक मगरमच्छ ने उसके पति का पैर पकड़ लिया। करवा ने अपने सतीत्व के बल पर कच्चे सूत के धागे से मगरमच्छ को बांध दिया और यमराज के पास जा पहुंची। यमराज ने करवा के तपोबल से विवश होकर मगरमच्छ को यमलोक दंड दिया और उसके पति को चिरायु का वरदान दिया।

कथा श्रवण फल:

जो भी सुहागिन इस कथा को सुनती है, करवा माता और भगवान शिव-पार्वती की कृपा से उसका सुहाग सदा अटल रहता है।

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कपूर आरती, पुष्पांजलि एवं क्षमा प्रार्थना स्तुति

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔कपूर गौरं स्तुति

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔आत्म समर्पण प्रार्थना

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

🔔महाआरती (ॐ जय जगदीश हरे)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।

सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥

🔔क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥

साक्षात दिव्य गर्भगृह प्रसारण

साक्षात आरती व दर्शन व दिव्य गर्भगृह दर्शन में सम्मिलित हों

🔔आरती व दर्शन लाइव दर्शन देखें
🪔पूजन सामग्री की संपूर्ण वैदिक सूची

करवा चौथ व्रत — पूजन सामग्री

शास्त्रोक्त सामग्री, फल, पुष्प, नवग्रह समिधा व आवश्यक पूजन विधान सूची देखें।

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