सभी पावन व्रत एवं त्यौहारप्रमुख पर्व एवं व्रत
ॐ
Jitiya Vrat (Jivitputrika)
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प्रमुख पर्व एवं व्रत

जितिया व्रत (जीवित्पुत्रिका)

संतान की दीर्घायु व रक्षा हेतु निर्जला व्रत

माताओं द्वारा संतान की लंबी आयु, आरोग्य व कल्याण हेतु रखा जाने वाला 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत।

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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

5 चरण
1

नहाय-खाय (सप्तमी तिथि)

🪔 पूजन सामग्री:नोनी का साग, मडुआ का आटा, गंगाजल

सप्तमी के दिन व्रती माताएं प्रातः स्नान कर नोनी का साग, मडुआ की रोटी और झोर-भात का सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। सायंकाल के बाद अन्न-जल का त्याग कर निर्जला व्रत का संकल्प लिया जाता है।

📿मंत्र जप

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ ॐ जीमूतवाहनाय नमः।

2

अष्टमी निर्जला व्रत एवं कुशा प्रतिमा स्थापना

🪔 पूजन सामग्री:पवित्र कुशा, मिट्टी/गोबर, सिंदूर, सरसों का तेल, खल्ली

अष्टमी को 24 घंटे का कठोर निर्जला उपवास रखा जाता है। घर के आंगन में छोटा सा तालाब बनाकर या वेदी पर कुशा से राजा जीमूतवाहन तथा गोबर/मिट्टी से चील और सियारिन की प्रतिमा बनाई जाती है।

📿मंत्र जप

जीमूतवाहनो नाम विद्याधरपतिर्महान्। परोपकारनिरतः सर्वभूतहिते रतः॥ ॐ जीमूतवाहनाय नमः।

3

सरसों तेल, खल्ली व जीतिया धागा अर्पण

🪔 पूजन सामग्री:सरसों तेल, खल्ली, जीतिया धागा, खीरा, अक्षत

राजा जीमूतवाहन और चील-सियारिन को सरसों का तेल, खल्ली और सिंदूर का टीका लगाएं। लाल या पीले रंग का सूती जीतिया धागा (जिसमें गांठें लगी हों) पूजा में रखकर पुत्र की दीर्घायु हेतु धारण करें।

📿मंत्र जप

॥ ॐ जीमूतवाहनाय नमः पुष्पं गन्धं तैलं समर्पयामि ॥

4

पावन जितिया व्रत कथा श्रवण

🪔 पूजन सामग्री:कथा पोथी, अक्षत, पुष्प

हाथ में अक्षत व पुष्प लेकर राजा जीमूतवाहन के महान त्याग और चील-सियारिन की पौराणिक कथा का श्रवण करें।

📿मंत्र जप

जय जय जीमूतवाहन, जय जय जीवित्पुत्रिका। मात-पिता की रक्षा करो, हर लो दुःख दरिद्रता॥

5

नवमी पारण विधान

🪔 पूजन सामग्री:अर्घ्य लोटा, नोनी साग, मडुआ रोटी

नवमी तिथि के सूर्योदय पश्चात सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पूजन करें। मडुआ की रोटी, नोनी साग व मीठे पकवानों से व्रत का पारण करें।

📿मंत्र जप

ॐ आदित्याय नमः। पुत्रायुष्यं देहि मे देव सर्वसम्पत्प्रदायक॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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जीमूतवाहन मूल मंत्र

॥ ॐ जीमूतवाहनाय नमः ॥

Om Jimutavahanaya Namah

अर्थ: संतान रक्षक और परोपकारी गंधर्व राज भगवान जीमूतवाहन को मेरा बारंबार नमन।
📿108 बार✨ संतान की अकाल संकट से रक्षा, उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

जीवित्पुत्रिका (जितिया) पावन व्रत कथा

राजा जीमूतवाहन का परोपकार एवं चील-सियारिन की कथा

1प्रथम प्रसंग: राजा जीमूतवाहन और शंखचूड़ नाग की रक्षा

गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन परम दयालु और परोपकारी थे। एक दिन भ्रमण करते हुए उनकी भेंट नागमाता से हुई, जिसका पुत्र शंखचूड़ पक्षीराज गरुड़ का आहार बनने वाला था। जीमूतवाहन ने शंखचूड़ की रक्षा हेतु स्वयं को वधशिला पर लाल कपड़े में लपेटकर प्रस्तुत कर दिया। गरुड़ जब उनके शरीर को नोंचने लगे, तब जीमूतवाहन के चेहरे पर कोई भय नहीं था। उनके अद्भुत त्याग और दया से अभिभूत होकर गरुड़ जी ने उन्हें जीवनदान दिया और भविष्य में कभी किसी नाग को न खाने का वचन दिया।

2द्वितीय प्रसंग: चील और सियारिन की कथा

एक वन में चील और सियारिन ने साथ मिलकर जितिया का निर्जला व्रत रखने का संकल्प लिया। सियारिन भूख बर्दाश्त न कर सकी और उसने श्मशान जाकर शव खा लिया, जिससे उसका व्रत खंडित हो गया। चील ने निष्ठा से व्रत पूर्ण किया। अगले जन्म में चील के सातों पुत्र दीर्घायु और तेजस्वी हुए, जबकि सियारिन की संतानें बाल्यावस्था में ही मृत्यु को प्राप्त हो गईं।

कथा श्रवण फल:

इस कथा को सुनने वाली माताओं की संतान पर कभी कोई संकट नहीं आता और वे दीर्घायु होते हैं।

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जितिया व्रत आरती एवं जीवित्पुत्रिका चालीसा

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ जय जय जीमूतवाहन, जय जय जीवित्पुत्रिका॥

🔔जितिया व्रत आरती (भाग 1: सूर्य वंदना)

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।

त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन॥

सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।

दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन॥

🔔जितिया व्रत आरती (भाग 2: दिव्य तेज)

सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।

अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन॥

सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।

विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन॥

🔔जितिया व्रत आरती (भाग 3: कृपा याचना)

कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।

सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन॥

नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।

वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन॥

सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।

हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन॥

🔔जीवित्पुत्रिका चालीसा (दोहा)

जय जय जीमूतवाहन, जय जय जीवित्पुत्रिका।

मात-पिता की रक्षा करो, हर लो दुःख दरिद्रता॥

🔔जीवित्पुत्रिका चालीसा (चौपाई - भाग 1)

अश्विन मास कृष्ण पक्ष अष्टमी, नाम तुम्हारा जीवित्पुत्रिका।

सुख-शांति तुम दो माता, तुम बिन नहीं कोई सहारा॥

पुत्र की रक्षा करो माता, तुम तो हो जग पालनहारा।

पूत-सुपूत बनाओ माता, सुख-शांति तुम देना॥

कथा सुनी जब जीमूतवाहन की, दुख की घड़ी में तुम याद आई।

तुमने पुत्र को दिया जीवन, तुम्हारी कृपा सदा बनी रहे॥

🔔जीवित्पुत्रिका चालीसा (चौपाई - भाग 2)

जय जय माता तुम सबकी, हर लो हर संकट तुम हमारी।

बाल-बाल को रखो सुरक्षित, तुम्हारी महिमा सबसे न्यारी॥

जो जन चालीसा ये पढ़े, हर इच्छा उसकी पूरी हो।

मात-पिता को सुख-शांति मिले, और घर में धन-संपदा हो॥

पुत्र की रक्षा तुम ही करती, तुम तो जग की पालनहारी।

तुम्हारी दया से सब कुछ मिले, तुम सबकी हो पालनहारी॥

🔔जीवित्पुत्रिका चालीसा (समापन दोहा)

जीवित्पुत्रिका माता, कृपा करो सब पर।

संतान को सुखी रखो, और दूर करो हर संकट॥

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व्रत के आवश्यक नियम एवं सावधानियां

न करें ये गलतियां (सावधानियां)

जितिया व्रत अत्यंत पवित्र और निष्ठा का पर्व है। इसमें इन प्रमुख बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • •अपने शहर के पंचांग को देखे बिना दूसरे शहर के पारण समय का पालन न करें।
  • •हर क्षेत्रीय पूजन सामग्री को जरूरी समझकर तनाव न लें।
  • •गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर भी कठोर निर्जला व्रत न करें।
  • •डॉक्टर द्वारा बताई गई जरूरी दवाओं का सेवन बीच व्रत के दौरान भी करें।
  • •अनुशासन और भक्ति भावना के बजाय डर या अंधविश्वास के प्रभाव में न आएं।
  • •अपनी पारिवारिक कथा या खान-पान की परंपरा को ही एकमात्र सही तरीका न मानें।
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जितिया व्रत (जीवित्पुत्रिका) — पूजन सामग्री

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