बृहस्पतिवार व्रत कथा: राजा, रानी और देवगुरु कृपा
दान का महत्व और वैभव की पुनर्प्राप्ति
1कथा प्रसंग: रानी की कृपणता और सर्वनाश
एक प्रतापी राजा की रानी अत्यंत कृपण थी और साधु-संतों को दान नहीं देती थी। देवगुरु बृहस्पति साधु वेश में आए और रानी की इच्छा अनुसार ऐसा उपाय बताया जिससे उसका सारा धन नष्ट हो गया। दाने-दाने को तरसने पर रानी को पश्चाताप हुआ। तब उसने गुरुवार का व्रत रखा और चने की दाल से पूजा की। देवगुरु की कृपा से उसका सारा वैभव वापस लौट आया।
शीघ्र विवाह, ज्ञान में वृद्धि, और घर में अखंड लक्ष्मी का वास।
