सभी पावन व्रत एवं त्यौहारसाप्ताहिक वार व्रत
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Guruvar Vrat (Thursday Fast)
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साप्ताहिक वार व्रत

गुरुवार व्रत (बृहस्पति देव)

भगवान श्री हरि विष्णु व देवगुरु बृहस्पति

ज्ञान, सौभाग्य, उच्च विद्या व सुखी दांपत्य जीवन हेतु देवगुरु बृहस्पति व भगवान लक्ष्मीनारायण को समर्पित व्रत।

डाउनलोड सामग्री लिस्ट📿108 मंत्र जप साधनाWhatsApp शेयर🔔श्री हरि आरती
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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

3 चरण
1

प्रातः स्नान व पीले वस्त्र धारण

🪔 पूजन सामग्री:पीले वस्त्र, चने की दाल, गुड़, हल्दी, केला पत्ता

गुरुवार को सिर धोने और साबुन लगाने से बचें। पीले वस्त्र पहनें और चने की दाल व गुड़ से बृहस्पति देव की पूजा करें।

📿मंत्र जप

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः। ॐ बृं बृहस्पतये नमः।

2

केले के वृक्ष का पूजन

🪔 पूजन सामग्री:हल्दी, चने की दाल, गुड़, घी का दीपक

केले के पेड़ की जड़ में जल, हल्दी, चने की दाल और गुड़ अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।

📿मंत्र जप

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

3

बृहस्पतिवार व्रत कथा श्रवण

🪔 पूजन सामग्री:कथा पोथी, पीला मिष्ठान

प्रतापी राजा और कृपण रानी की पावन कथा सुनें। शाम को चने की दाल का हलवा या पीला भोजन एक समय ग्रहण करें।

📿मंत्र जप

देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसंनिभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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बृहस्पति बीज मंत्र

॥ ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः ॥

Om Gram Greem Groum Sah Gurave Namah

अर्थ: देवगुरु बृहस्पति को मेरा प्रणाम।
📿108 बार✨ शिक्षा, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होना, ज्ञान व धन प्राप्ति।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

बृहस्पतिवार व्रत कथा: राजा, रानी और देवगुरु कृपा

दान का महत्व और वैभव की पुनर्प्राप्ति

1कथा प्रसंग: रानी की कृपणता और सर्वनाश

एक प्रतापी राजा की रानी अत्यंत कृपण थी और साधु-संतों को दान नहीं देती थी। देवगुरु बृहस्पति साधु वेश में आए और रानी की इच्छा अनुसार ऐसा उपाय बताया जिससे उसका सारा धन नष्ट हो गया। दाने-दाने को तरसने पर रानी को पश्चाताप हुआ। तब उसने गुरुवार का व्रत रखा और चने की दाल से पूजा की। देवगुरु की कृपा से उसका सारा वैभव वापस लौट आया।

कथा श्रवण फल:

शीघ्र विवाह, ज्ञान में वृद्धि, और घर में अखंड लक्ष्मी का वास।

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कपूर आरती, पुष्पांजलि एवं क्षमा प्रार्थना स्तुति

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔कपूर गौरं स्तुति

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

🔔आत्म समर्पण प्रार्थना

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

🔔महाआरती (ॐ जय जगदीश हरे)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।

सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥

🔔क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥

साक्षात दिव्य गर्भगृह प्रसारण

साक्षात श्री हरि आरती व दिव्य गर्भगृह दर्शन में सम्मिलित हों

🔔श्री हरि आरती लाइव दर्शन देखें
🪔पूजन सामग्री की संपूर्ण वैदिक सूची

गुरुवार व्रत (बृहस्पति देव) — पूजन सामग्री

शास्त्रोक्त सामग्री, फल, पुष्प, नवग्रह समिधा व आवश्यक पूजन विधान सूची देखें।

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