बुधवार व्रत कथा: साहूकार और बुध देव का चमत्कार
अहंकार मुक्ति और बुद्धि शुद्धि
1कथा प्रसंग: मधुसूदन और पत्नी विदाई
मधुसूदन अपनी पत्नी को ससुराल से विदा कराने गया। ससुराल वालों ने बुधवार को यात्रा न करने की सलाह दी, किंतु उसने अहंकार में बात नहीं मानी। रास्ते में उसकी पत्नी के बगल में हूबहू मधुसूदन जैसा दूसरा व्यक्ति बैठ गया। राजा के सामने न्याय में जब वह हारने लगा, तब उसने बुध देव से क्षमा मांगी। बुध देव अंतर्ध्यान हो गए और मधुसूदन ने सदा बुधवार के नियमों का पालन किया।
व्यापार में वृद्धि, वाणी में प्रभाव और बुद्धि तेज होती है।