सभी पावन व्रत एवं त्यौहारप्रमुख पर्व एवं व्रत
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Chhath Puja
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प्रमुख पर्व एवं व्रत

महापर्व छठ पूजा

भगवान सूर्यदेव व छठी मइया की पावन उपासना

चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व, जिसमें अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर संतान व परिवार का कल्याण मांगा जाता है।

डाउनलोड सामग्री लिस्ट📿108 मंत्र जप साधनाWhatsApp शेयर🔔सूर्य / गंगा आरती
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पावन पूजा विधि एवं अनुष्ठान

शास्त्रोक्त वैदिक चरण, पवित्र संकल्प व नैवेद्य विधान

4 चरण
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प्रथम दिवस: नहाय-खाय विधान

🪔 पूजन सामग्री:सेंधा नमक, घी, कद्दू (घिया), चना दाल, अरवा चावल, मिट्टी का चूल्हा

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को पवित्र नदी अथवा गंगाजल से स्नान कर घर की पूर्ण शुद्धि करें। केवल सेंधा नमक, घी, चना दाल और कद्दू (लौकी) की सात्विक सब्जी व अरवा चावल का भोजन ग्रहण करें।

📿मंत्र जप

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

2

द्वितीय दिवस: खरना एवं निर्जला व्रत आरंभ

🪔 पूजन सामग्री:गुड़, गाय का दूध, अरवा चावल, गेहूं की रोटी, आम की लकड़ी, मिट्टी का चूल्हा

पंचमी के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। सायंकाल मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़, दूध और अरवा चावल की खीर व घी लगी रोटी बनाकर छठी मैया को भोग लगाएं। व्रती स्वयं इसे ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू करते हैं।

📿मंत्र जप

ॐ श्री षष्ठी देव्यै नमः। ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं षष्ठी देव्यै नमः स्वाहा।

3

तृतीय दिवस: संध्या अर्घ्य (अस्ताचलगामी सूर्य वंदना)

🪔 पूजन सामग्री:बांस का सूप, दौरा, ठेकुआ, गन्ना (गांठ सहित), डाभ नींबू, सिंदूर, गाय का दूध

षष्ठी के दिन बांस के सूप व दौरा में शुद्ध घी के ठेकुआ, कसार, मौसमी फल (डाभ नींबू, गन्ना, केला, सेब, सिंघाड़ा) सजाएं। नदी/तालाब के पवित्र जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी (डूबते) भगवान सूर्य एवं छठी मैया को दूध व गंगाजल से पहला अर्घ्य अर्पित करें।

📿मंत्र जप

ॐ एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥

4

चतुर्थ दिवस: उषा अर्घ्य (उदीयमान सूर्य अर्घ्य) व पारण

🪔 पूजन सामग्री:अर्घ्य पात्र, कच्चा दूध, गंगाजल, अदरक, गुड़, ठेकुआ

सप्तमी की भोर में पुनः जल में खड़े होकर उदीयमान (उगते) सूर्यदेव को अर्घ्य दें। सूर्य की किरणें सूप से छनकर आती हैं। अर्घ्य के पश्चात घाट पर क्षमा प्रार्थना करें, सिंदूर दान लें और ठेकुआ व अदरक-पानी से पावन पारण करें।

📿मंत्र जप

ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्॥

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पावन सिद्ध मंत्र एवं जप साधना

शास्त्रोक्त वैदिक महामंत्र, शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं 108 जप विधान

📿108 108 मंत्र जप साधना
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सूर्य अर्घ्य महामंत्र (Surya Arghya Mantra)

ॐ एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥

Om Ehi Surya Sahastransho Tejorashe Jagatpate | Anukampaya Mam Bhaktya Grihanarghyam Divakara ||

अर्थ: हे सहस्त्र किरणों वाले, तेज के पुंज, संपूर्ण जगत के स्वामी भगवान सूर्यदेव! मुझ भक्त पर कृपा कर मेरा यह अर्घ्य स्वीकार करें।
📿अर्घ्य देते समय 3 या 7 बार✨ उत्तम स्वास्थ्य, तेज, चर्म रोग नाश और संतान सुख।
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छठी मईया (षष्ठी देवी) स्तोत्र

॥ ॐ श्री षष्ठी देव्यै नमः ॥ नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः। पुत्रदात्रीं धनदात्रीं षष्ठीदेवीं नमाम्यहम्॥

Namo Devyai Mahadevyai Shivayai Satatam Namah | Putradatrim Dhanadatrim Shashthidevim Namamyaham ||

अर्थ: संतान सुख, आरोग्य व धन-धान्य प्रदान करने वाली ब्रह्मा जी की मानस पुत्री षष्ठी देवी (छठी मईया) को मेरा कोटि-कोटि प्रणाम।
📿21 बार✨ संतान की दीर्घायु, रक्षा और वंश वृद्धि।
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पावन व्रत कथा एवं महात्म्य

पौराणिक आख्यान, भक्ति कथा एवं अखंड फलश्रुति

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🌸 पूजा विधि के समय इस पावन व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें

📜प्राचीन पोथी पाठ

छठी मईया की पावन कथा: राजा प्रियंवद एवं देवसेना प्रसंग

ब्रह्मवैवर्त पुराण से षष्ठी देवी माहात्म्य

1प्रथम प्रसंग: राजा प्रियंवद का पुत्र शोक

प्राचीन काल में राजा प्रियंवद और उनकी पत्नी मालिनी को कोई संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया, जिसके प्रभाव से रानी गर्भवती हुईं किंतु नौ माह पश्चात मृत बालक का जन्म हुआ। राजा शोक में डूबकर श्मशान में अपने प्राण त्यागने को उद्यत हुए।

2द्वितीय प्रसंग: देवसेना (षष्ठी देवी) का दिव्य प्राकट्य

उसी समय आकाश से एक दिव्य विमान उतरा, जिसमें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री 'देवसेना' विराजमान थीं। देवी ने कहा—'हे राजन! मैं प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न षष्ठी देवी हूं। जो भी प्राणी मेरी पूजा करता है, उसे संतान और समस्त सुख प्राप्त होते हैं।' देवी ने बालक का स्पर्श किया और वह खिलखिला कर जीवित हो उठा।

3तृतीय प्रसंग: द्रौपदी एवं माता सीता द्वारा छठ व्रत

द्वापर युग में जब पांडव जुए में राजपाट हारकर वनवास काट रहे थे, तब द्रौपदी ने महर्षि धौम्य के कहने पर कठिन छठ व्रत किया, जिससे पांडवों को उनका राज्य वापस मिला। त्रेतायुग में लंका विजय के पश्चात श्री राम और माता सीता ने भी सूर्यदेव का षष्ठी व्रत कर राजसूय यज्ञ किया था।

कथा श्रवण फल:

छठ पूजा की कथा सुनने से संतान हीन को संतान, निर्धन को धन और रोगी को उत्तम काया की प्राप्ति होती है।

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छठी मइया एवं सूर्य देव की पावन आरती

पावन नीराजन, दिव्य आरती स्तुति एवं सस्वर पाठ

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आरती प्रारंभ (मुखड़ा)

काँच ही बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकत जाए। जय छठी मइया, हे छठी मइया सब पर कृपा बरसाए॥

🔔संध्या अर्घ्य पावन स्तुति

काँच ही बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकत जाए॥

बात जे पूछेला बटोहिया, बहँगी केकरा के जाए।

तू त आन्हर हउवे रे बटोहिया, बहँगी छठी माई के जाए॥

काँच ही बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकत जाए॥

🔔पवित्र फल अर्पण स्तुति

केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय।

उ जे खबरी जनइबो अदिक (सूरज) से, सुगा देले जुठियाय॥

काँच ही बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकत जाए॥

नारियर जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय।

आदिते देव होई प्रसन्न, सब मनोरथ पुरवय॥

🔔छठी मइया मंगल आरती

जय छठी मइया, हे छठी मइया।

पुत्र, पौत्र, धन, धान्य से भरि द गोदिया।

सदा सुख संपदा देहिया निरोगी।

काँच ही बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकत जाए॥

जय छठी मइया, हे छठी मइया सब पर कृपा बरसाए॥

साक्षात दिव्य गर्भगृह प्रसारण

साक्षात सूर्य / गंगा आरती व दिव्य गर्भगृह दर्शन में सम्मिलित हों

🔔सूर्य / गंगा आरती लाइव दर्शन देखें
🪔पूजन सामग्री की संपूर्ण वैदिक सूची

महापर्व छठ पूजा — पूजन सामग्री

शास्त्रोक्त सामग्री, फल, पुष्प, नवग्रह समिधा व आवश्यक पूजन विधान सूची देखें।

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